
डिजिटल डेस्क, पेरिस। बढ़ती महंगाई और शिक्षा तंत्र की लचर हालत को लेकर फ्रांस में शुरू हुआ आंदोलन अब बेहद हिंसक रूप अख्तियार कर चुका है। राजधानी पेरिस समेत देश के कई बड़े हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी नोकझोंक व टकराव हुआ। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने अब तक 1,300 से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया है।
पेरिस स्थित 'साइंसेज पो' शैक्षणिक संस्थान के मुख्य रास्ते को छात्रों ने पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया था। उन्हें रास्ते से हटाने के लिए दंगा-रोधी पुलिस ने बल प्रयोग किया और छात्रों को जबरन घसीटकर वहां से बाहर किया।
सामने आए फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि छात्र सरकार विरोधी नारे लगा रहे थे, तभी सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को खदेड़ने के लिए लाठियां भांजीं और कुछ लोगों को रेलिंग की ओर धकेलते हुए जमीन पर गिरा दिया, जिससे इलाके में अफरातफरी मच गई।
गृह मंत्रालय का कहना है कि यह सख्त कार्रवाई उपद्रवियों पर लगाम कसने के लिए जरूरी थी, क्योंकि शनिवार को हुई हिंसा के दौरान लगभग 34 दुकानों में जमकर तोड़फोड़ और लूटपाट की गई थी। इस हिंसक टकराव में 53 पुलिसकर्मी भी चोटिल हुए हैं।
विरोध-प्रदर्शनों के विस्तार को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं।गृह मंत्रालय के आंकड़े बता रहे हैं कि देशभर में हुए करीब 298 प्रदर्शनों में लगभग 4.10 लाख नागरिकों ने हिस्सा लिया। वहीं ट्रेड यूनियन ट्रेड 'जनरल कॉन्फेडरेशन ऑफ लेबर' (CGT) का दावा है कि आंदोलन में 8 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतरे।
कई इलाकों में विरोध मार्च शांतिपूर्ण ढंग से निकाले गए, लेकिन पेरिस सहित प्रमुख औद्योगिक व प्रशासनिक केंद्रों में हालात तनावपूर्ण बने रहे। सार्वजनिक संपत्तियों और व्यापारिक संस्थानों को पहुंचाए गए नुकसान की जांच सरकार ने शुरू कर दी है। पिछली घटनाओं से सबक लेते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाबलों की तैनाती बढ़ा दी है और सघन तलाशी अभियान जारी है।