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200 साल बाद महिला को मिली मौत की सजा, 18 की उम्र में बॉयफ्रेंड संग मिलकर की थी हत्या, दिया जाएगा लीथल इंजेक्शन

संयुक्त राज्य अमेरिका के टेनेसी राज्य में दो शताब्दियों (200 वर्ष) के लंबे अंतराल के पश्चात पहली बार किसी महिला कैदी को मृत्युदंड (मौत की सजा) दिया जा...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Tue, 29 Sep 2026 02:52:58 PM (IST)Updated Date: Tue, 29 Sep 2026 02:52:58 PM (IST)
200 साल बाद महिला को मिली मौत की सजा, 18 की उम्र में बॉयफ्रेंड संग मिलकर की थी हत्या, दिया जाएगा लीथल इंजेक्शन
टेनेसी में 200 साल बाद ऐतिहासिक फैसला।

HighLights

  1. टेनेसी में 200 साल बाद ऐतिहासिक फैसला
  2. मानसिक बीमारी और शोषण का दिया तर्क
  3. ईर्ष्या में ली थी 19 वर्षीय सहपाठी की जान

डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। संयुक्त राज्य अमेरिका के टेनेसी राज्य में दो शताब्दियों (200 वर्ष) के लंबे अंतराल के पश्चात पहली बार किसी महिला कैदी को मृत्युदंड (मौत की सजा) दिया जा रहा है। 50 वर्षीया क्रिस्टा पाइक को बुधवार, 30 सितंबर को यह सजा दी जाएगी।

क्रिस्टा पाइक अमेरिकी इतिहास में सबसे कम उम्र में मृत्युदंड की सजा पाने वाली महिला बनी थीं, जब उन्हें 18 वर्ष की आयु में अपनी ही एक सहपाठी की ईर्ष्या व रंजिश के कारण निर्मम हत्या करने का दोषी ठहराया गया था।


क्या था पूरा मामला और हत्या की वजह?

वर्ष 1995 में टेनेसी के नॉक्सविले जॉब कॉर्प्स में अध्ययनरत क्रिस्टा पाइक और उनके प्रेमी ने मिलकर अपनी 19 वर्षीया क्लासमेट कोलीन स्लेमर की बेरहमी से हत्या कर दी थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, क्रिस्टा को संदेह था कि कोलीन उनके प्रेम संबंध में बाधा बन रही है।

इसी रंजिश के तहत क्रिस्टा ने कोलीन को एक एकांत स्थल पर बुलाया, जहां अपने प्रेमी के साथ मिलकर उसने पीड़िता को भारी शारीरिक मानसिक यातनाएं दीं और अंततः उसकी जान ले ली। इस वारदात में पीड़िता के शरीर पर विकृत प्रतीक उकेरे जाने और कम उम्र के आरोपियों की संलिप्तता के कारण मामले ने वैश्विक स्तर पर मीडिया का ध्यान आकर्षित किया था।

मानसिक बीमारी और गंभीर बाल शोषण का शिकार

हालांकि क्रिस्टा पाइक ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया था, परंतु उनके कानूनी प्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि अपराध के समय वह एक ऐसी किशोरी थीं जो गंभीर मानसिक विकारों (बाइपोलर डिसऑर्डर और पीटीएसडी) से जूझ रही थीं।

दया याचिका में पाइक के वकीलों ने उल्लेख किया कि बचपन से ही वह भयानक शारीरिक, मानसिक और यौन शोषण का शिकार रही थीं। उनके डिफेंस काउंसिल के अनुसार, मुख्य मुकदमे के दौरान जूरी के समक्ष पाइक के दर्दनाक अतीत और मानसिक स्थिति से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य प्रभावी ढंग से प्रस्तुत नहीं किए जा सके थे।

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गवर्नर ने खारिज की दया याचिका, सुप्रीम कोर्ट पहुंची अपील

अपनी दया याचिका के लिखित बयान में स्वयं पाइक ने गहरा पश्चाताप व्यक्त करते हुए स्वीकार किया कि 18 वर्ष की आयु में मानसिक रूप से अस्वस्थ होने के कारण वह अपने कृत्य की भयावहता को समझ नहीं सकी थीं। उन्होंने कहा कि एक निर्दोष की जान लेने के अपने कृत्य पर उन्हें ग्लानि महसूस होती है।

दूसरी ओर, मृतका की मां ने दशकों के इंतजार का हवाला देते हुए पाइक को जानलेवा इंजेक्शन (लीथल इंजेक्शन) के जरिए सजा-ए-मौत दिए जाने की मांग की है। इस बीच, टेनेसी के गवर्नर बिल ली ने पाइक की दया याचिका को आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया है, जिसके पश्चात उनके वकीलों ने सजा पर अंतरिम रोक लगाने के लिए अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट में अंतिम याचिका दाखिल की है।